मुझे उस शख्स की परवाह बहुत है

मुझे उस शख्स की परवाह बहुत है 
जो समझा तो यही रिश्ता बहुत है 
वो एक बात जो सबसे छुपाई 
उसी एक बात का चर्चा बहुत है 
मेरी ख्वाहिस कभी पूरी ना होगी
मुझे इस बात का सदमा बहुत है 
किसी को भुलाना मुमकिन नहीं है 
वर्ना हमने तो चाहा बहुत है 
कहाँ तक और मेरा साथ देगा वो 
पहले ही यहाँ रुसवा बहुत है 
तेरे जैसा कोई मिलता नहीं है 
तेरा जैसा मगर ढूंडा बहुत है 
चलो अब मौत का सामना कर ले 
जीना तो यहाँ महंगा बहुत है 
वो मेरे पास कब ठहरे है आखिर 
जो मेरे पास से गुज़रे बहुत है  

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