Posts

Showing posts with the label life

खाली दिमाग का घंटाघर!

Image
यूँ ही राह चलते क्या तलाशते रहते हो जब किसी से यूँ ही नज़रें मिल जाती हैं...किसी को तो ढूंढते हो. वो क्या है जो आँखों के सामने रह रह के चमक उठता है. आखिर क्यूँ भीड़ में अनगिन लोगों के होते हुए, किसी एक पर नज़र ठहरती है. वो एक सेकंड के हजारवें हिस्से में किसी की आँखों में क्या नज़र आता है...पहचान, है न? एक बहुत पुरानी पहचान. किसी को देख कर न लगे कि पहली बार देखा हो. जैसे कि इस खाली सड़क पर, खूबसूरत मौसम में अकेले चलते हुए तुम्हें उसे एक पल को देखना था...इतना भर ही रिश्ता था और इतने भर में ही पूरा हो गया. रिश्तों की मियाद कितनी होती है? कितना वक़्त होता है किसी की जिंदगी में पहली प्राथमिकता होने का...आप कभी भी ताउम्र किसी की प्राथमिकता नहीं बन सकते, और चीज़ें आएँगी, और लोग आयेंगे, और शहर मिलेंगे, बिसरेंगे, छूटेंगे...कितना बाँधोगे मुट्ठी में ये अहसास कि तुम्हारे इर्द गिर्द किसी की जिंदगी घूमती है. कुछ लोग आपके होते हैं...क्या होते हैं मालूम नहीं. वो भी आपसे पूछेंगे कि उनका आपसे रिश्ता क्या है तो आप कभी बता नहीं पायेंगे, किसी एक रिश्ते में बाँध नहीं पाएंगे. प्यार कभी कभी ऐसा अमूर्त ह...

वो छोटी सी वजह हो मेरे जीने की...

Image
कुछ जवाबों का हमें ता उम्र इंतज़ार रहता है...खास तौर से उन जवाबों का जिनके सवाल हमने कभी पूछे नहीं, पर सवाल मौजूद जरूर थे...और बड़ी बेचारगी से अपने पूछे जाने की अर्जी लिए घूमते थे...और हम उससे भी ज्यादा बेदर्द होकर उनकी अर्जियों की तरफ़ देखते तक नहीं थे... जिसे नफरत तोड़ नहीं सकती...उपेक्षा तोड़ देती है, नफरत में एक अजीब सा सुकून है, कहीं बहुत गहरे जुड़े होने का अहसास है, नफरत में लगभग प्यार जितना ही अपनापन होता है, बस देखने वाले के नज़रिए का फर्क होता है... कुछ ऐसे जख्म होते हैं जिनका दर्द जिंदगी का हिस्सा बन जाता है...बेहद नुकीला, हर वक्त चुभता हुआ, ये दर्द जीने का अंदाज ही बदल देता है...एक दिन अचानक से ये दर्द ख़त्म हो जाए तो हम शायद सोचेंगे कि हम जो हैं उसमें इस दर्द का कितना बड़ा हिस्सा है...जिन रास्तों पर चल के हम आज किसी भी मोड़ पर रुके हैं, उसमें कितना कुछ इस दर्द के कारण है...इस दर्द के ठहराव के कारण कितने लोग आगे बढ़ गए...हमारी रफ़्तार से साथ बस वो चले जो हमारे अपने थे...इस दर्द में शरीक नहीं...पर उस राह के हमसफ़र जिसे इस दर्द ने हमारे लिए चुना था। मर जाने के लिए एक वजह ह...

अनजान दो लोग

सवालों का बरछत्ता

 मैं हवा में गुम होती जा रही हूँ, उसे नहीं दिखता...उसके सामने मेरी आँखों  का रंग फीका पड़ता जाता है, उसे नहीं दिखता...मैं छूटती जा रही हूँ कहीं, उसे नहीं दिखता... --- मैं गुज़रती हूँ हर घड़ी किसी अग्निपरीक्षा से...मेरा मन ही मुझे खाक करता जाता है। यूँ हार मानने की आदत  तो कभी नहीं रही। कैसी थकान है, सब कुछ हार जाने जैसी...कुरुक्षेत्र में कुन्ती के विलाप जैसी...न कह पाने की विवशता...न खुद को बदल पाने का हौसला, जिन्दगी आखिर किस शय का नाम है? कर्ण को मिले शाप जैसी, ऐन वक्त पर भूले हुये ब्रम्हास्त्र जैसी...क्या खो गया है आखिर कि तलाश में इतना भटक रही हूँ...क्या चाहिये आखिर? ये उम्र तो सवाल पूछने की नहीं रही...मेरे पास कुछ तो जवाब होने चाहिये जिन्दगी के...धोखा सा लगता है...जैसे तीर धँसा हो कोई...आखिर  जिये जाने का सबब कुछ तो हो! --- क्या चाहिये होता है खुश रहने के लिये? कौन सा बैंक होता है जहाँ सारी खुशियों का डिपॉजिट होता है? मेरे अकाउंट में कुछ लोग पेन्डिंग पड़े हैं। उनका क्या करूँ समझ नहीं आता ...अरसा पहले उनके बिना जिन्दगी अधूरी थी...अरसा बा...

मैं और तुम

मेरे तुम्हारे बीच उग आया है कंटीला मौन का जंगल जाने कब खो गयीं शब्दों की राहें खिलखिलाहटों की पगडंडियाँ ऊपर नज़र आता है स्याह अँधेरा नहीं दिखता है चाँद नहीं दिखती तारों सी तुम्हारी आँखें काँटों में उलझ जाता है तुम्हारा स्पर्श ग़लतफ़हमी की बेल लिपट जाती है पैरों से और मैं नहीं जा पाती तुम्हारे करीब बहुत तेज़ होता जाता है झींगुरों का शोर मैं नहीं सुन पाती तुम्हारी धड़कन पैरों में लोटते हैं यादों के सर्प काटने को तत्पर शायद मेरी मृत्यु पर ही निकले तुम्हारे गले से एक चीख और तुम पा जाओ शब्द और जीवन

आइस क्यूब्स

ये झूठ है कि किसी से बिछड़ता है कोई हम बस, मर जाते हैं --------------------------- एयरटेल कहता है हमारी दुनिया में आप कभी अपनों से कभी जुदा नहीं होते ऐसा वादा खुदा क्यूँ नहीं करता कभी? ---------------------- कहीं से आती कोई हवाएं नहीं बता पाती हैं कि तुम्हारे काँधे से कैसी खुशबू आती है? -------------------- किसी भी पहर तुम्हारी आवाज़ नहीं भर सकती है  मुझे अपनी बांहों में!  ------------------------ मैं वाकई नहीं सोचती  लिप बाम लगाते हुए कि तुम्हारे होटों का स्वाद कैसा है! ---------------------------- मुझे कभी मत बताना कितनी आइस क्यूब डालते हो तुम अपनी विस्की में ----------------------------- कच्ची डाली से मत तोड़ा करो मेरी नींदें इनपर ख्वाब का फूल नहीं खिलता फिर ----------------------------- बातों का कैसे ऐतबार कर लूं तुम न कहते हो मुझसे झूठ झूठ  'आई लव यू'. --------------------------- सच कहती हैं सिर्फ उँगलियाँ जो तुम्हारा फ़ोन कॉल पिक करते हु...

जैसे कोई किनारा देता हो सहारा...

Image
तुमसे जितना झगड़ती हूँ प्यार उतना ही बढ़ता जाता है... रोती हूँ तो सपने धुल के नये से हो जाते हैं.. कुछ और चमकीले... तुम्हारे साथ हँसती हूँ तो उन सपनों में इन्द्रधनुषी रँग भर जाते हैं... तुम्हें हँसता देखती हूँ तो उनमें जान आ जाती है... हम तीनों मिल कर जी उठते हैं फिर से... तुम.. मैं और हमारे सपने...! तुम्हारी मुस्कुराहट को पेंट करने का दिल करता है कभी कभी... काँच सी पारदर्शी तुम्हारी आँखें... उतना चमकदार रँग बना ही नहीं जो उन्हें कैनवस पे उतार सके... कभी कभी सोचती हूँ तुम्हारी रूह को एक काला टीका लगा दूँ... कहाँ बची हैं अब इतनी पाकीज़ा रूहें धरती पर... कहाँ रह गये हैं इतने साफ़ दिल इंसान... मैं बूढ़ी होना चाहती हूँ तुम्हारे साथ... तुम्हें देखते हुए... तुमसे झगड़ते हुए... तुम्हें प्यार करते हुए.... उम्र के उस पड़ाव पर जब घुटनों में दर्द रहा करेगा... तुम्हारे गले में बाहें डाल मैं थिरकना चाहती हूँ तुम्हारी धड़कनों की सिम्फनी पे... मैं उड़ना चाहती हूँ तुम्हारे साथ तुम्हारा हाथ पकड़ के... तब जब ये दुनिया वाले शायद हमें शक की निगाहों से ना देखें... मैं पूरी दुनिया घूमना चाहती हूँ तुम्हारे साथ... व...

प्यार की ये चिट्ठी तुम्हारे नाम

Image
बहुत कुछ है जो तुमसे कहने का दिल हो रहा है... क्या ये नहीं मालूम... पर कुछ तो है... कितने ही शब्द लिखे मिटाये सुबह से... कोई भी वो एहसास बयां नहीं कर पा रहा जो मैं कहना चाहती हूँ... गोया सारे अल्फ़ाज़ गूंगे हो गए हैं आज... बेमानी... तुम सुन पा रहे हो क्या वो सब जो मैं कहना चाहती हूँ ? ऐसी ही किसी तारीख़ को ऐसे ही किसी प्यारे दिन की याद में ये लिखा था कभी... तुम्हारे लिए... आज भेज ही देती हूँ प्यार की ये चिट्ठी तुम्हारे नाम... *एक दूजे को देख कर जब मुस्कुरायीं थी आँखें पहली बार लम्हें का इक क़तरा थम गया था ! वो ख़ुशनुमा क़तरा आज भी बसा है ज़हन में वो पहली बार जब थामा था तुम्हारा हाथ मेरी उँगलियों ने बींध लिया था तुम्हारी उँगलियों का लम्स भी वो लम्स अब भी महकता है मेरे हाथों में उस आधे चाँद की मद्धम चाँदनी उम्मीद के कच्चे दिए की लौ सी टिमटिमाती हुई आज भी आबाद है दिल के अँधेरे कोने में कहीं सागर की उन बांवरी लहरों ने बाँध के मेरे पैरों को रोका हुआ है वहीं हमारे पैरों के निशां संजो रखे हैं साहिल की गीली रेत ने अब तलक जी करता है ठ...

मुझे/तुम्हें वहीं ठहर जाना था

Image
कसम से तुम्हारी बहुत याद आती है, जितना तुम समझते हो और जितना मैं तुमसे छिपाती हूँ उससे कहीं ज्यादा. मैं अक्सर तुम्हारे चेहरे की लकीरों को तुम्हारे सफहों से मिला कर देखती हूँ कि तुम मुझसे कितने शब्दों का झूठ बोल रहे हो...तुम्हें अभी तमीज से झूठ बोलना नहीं आया. तुम उदास होते हो तो तुम्हारे शब्द डगर-मगर चलते हैं. तुम जब नशा करते हो तो तुम्हारे लिखने में हिज्जे की गलतियाँ बढ़ जाती हैं...मैं तुम्हारे ख़त खोल कर पढ़ती हूँ तो शाम खिलखिलाने लगती है. वो दिन बहुत अच्छे हुआ करते थे जब ये अजनबीपन की बाड़ हमारे बीच नहीं उगी थी...इसके जंग लगे लोहे के कांटे हमारी बातों के तार नहीं काटा करते थे उन दिनों. ठंढ के मौसम में गर्म कप कॉफ़ी के इर्द गिर्द तुम्हारे किस्से और तुम्हारी दिल खोल कर हंसी गयी हँसी भी हुआ करती थी. लैम्पोस्ट पर लम्बी होती परछाईयाँ शाम के साथ हमारे किस्सों का भी इंतज़ार किया करती थी. तुम्हें भी मालूम होता था कि मेरे आने का वक़्त कौन सा है. किसी को यूँ आदत लगा देना बहुत बुरी बात है, मैं यूँ तो वक़्त की एकदम पाबंद नहीं हूँ पर कुछ लोगों के साथ इत्तिफाक ऐसा रहा कि उन्हें मेरा ...

tasveer

Image
bas ek khamoshi hi dil tod jaati hai baki to har baat acchi hai uski tasveer me  

लच्छेदार बातें

मैं जब भी तुम्हे याद करती हूँ, तब ढेर सी लच्छेदार बातें , और बहुत से किस्से याद आते हैं, तुम्हारी वो गर्म-गर्म साँसे जो हौले से मेरे चेहरे  पे लि ख जाती थी तुम्हारा नाम माँ के संग बैठ कर तकिये पर सर टीकाकार तुम्हारा छुप-छुपकर मुझे तिरछी नजरों से देखना इशारे करना गर्म चाय के प्याले को फूंक-फूंककर ठंडा करते वक़्त पापा से  छुपकर , मुझको प्यार से दिया गया तुम्हारा वो पहला फ्लाईंग किस डायरी से उड़ निकलने को बेताब इक खाली पन्ना और वो तुम्हारी लिखी हुई अधूरी कविता  ! वोह किताबों में सूखता हुआ गुलाब का  फूल जो तुमने मुझे वेलेंटाइन डे से पहले दिया था प्यार का  कहकर , बेहद पुरानी डायरी  में रखी हुई हमारी तस्वीर जिसके पीछे तुमने लिखा था फोरेवर योर्स !|♥♥ ओजस्विनी "तरु"
एक दौर से गुजरी तो ये महसूस किया कभी कभी ज़िन्दगी कितनी बदरंग  सी बहार  सजी हुई होती है दुल्हन की तरह ... कभी कभी मोहब्बत करने से और निभाने से भी जद कठिन होता है उसे छुपा के रखना ....किसी शक्ष से जब बेइम्तिहान मोहब्बत होती है और उसी शक्श से हम बात नहीं करना चाहते मालूम होता है दर्दनाक कुछ हुआ होगा ....कैसे खुश हो जाते है ये लैब खिलखिला के जब आँखों के कोरो में नमी छलकती होगी ......कोई हस्ती आँखों का दर्द बयां करे तो जाने हम के मोहब्बत वो शे है जो एक बार हो गयी तो हो गयी ..... कभी कही पड़ा था हमने के मोहब्बत दीवानगी की हद से गुज़र कर रूह में बस्ती है तो जूनून हो जाती है ..... पर अगर वाही मोहब्बत हदों को पर कर जिस्मो से लिपटे तो शर्मशार हो जाती है....बहुत कुछ सोचा ,...सिख भी तो…. इश्क के काफिले बहुत सुने है आज कल जो कल से आज के अलग अलग पैगाम देते है ... हमे तो नफरत भी मोहब्बत हबी नज़र आती है .....पांव ऊपर किये सर के बल कड़ी मोहब्बत ही नफरत है ..प्यार का उल्टा भाव ......आज कल नफरत की भावना से तरवोर हु .....कल तक खुद से नफरत किये बेठी थी ...

एक सुनहरी शाम

Image
एक सुनहरी शाम रोज़ मिलती है मुझे पिली चुनर लपेटे हुए .....हर रोज़ उससे बतियाना जैसे आदत सी हो गयी है मेरी ..... मेरे गाँव से शहर तक एक रास्ता जाता है .....मुझे भी रोज़ जाना पड़ता है उस रस्ते पर…शाम ढलते ही में लौट भी आती हु .....थके हारे परिंदे की तरह ......आते हुए बहुत लोग मिलते है उस रस्ते पर ..... मुझे मिलती है तरक्की जो मेरे गाँव को धीरे धीरे शहर में तब्दील कर देगी ...अभी वो पहुची नहीं है मेरे गाँव तक… काछे मकानों के बीचो बिच से होक पक्की सड़क है .... आज भी लिपे हुए आंगन मिलते है मुझे रोज़ रस्ते में ..... चार पहिये की गाडिया भी मिलती है मुझे ....मुझे एहसास होता है कभी कभी ......मेरे बड़े से गाँव  में भी छोटा सा शहर पैदा होने लगा है  ..... पर फिर भी मेरा गाँव आज भी खुबसूरत है,खेतो से मुझे आज भी महक आती है मेहनत के पसीने की,खून सा बहा पसीना आज भी लहलहाता है मेरे गाँव में दिलशाद सा। देखो  ज़रा शहर पल रहा है आज भी गाँव की गोद में,फलता फूलता,गाँव समेटे है शहर को अपनी गोद में,बच्चे सा जिद्दी शहर,छोटा शहर, बड़ा सा गाँव नदी की लहर . .

उस मोड़ से शुरू करें फिर ये ज़िन्दगी...

Image
Your Cheerful Looks Makes Day A Delight ! आज पलट के बीते सालों पे नज़र डालती हूँ तो यकीन नहीं होता... ये उसी लड़की के लिए कहा गया था कभी जो आज अपनों के लिए दुःख और उदासी का कारण बनी हुई है... ये टाइटल ऐसे ही नहीं दिया गया था उसे क्लास ट्वेल्फ्थ की फेयरवेल पार्टी में... उसकी खुशमिज़ाजी ने उसे स्कूल कॉलेज, यार दोस्तों के बीच एक अलग पहचान दी हुई थी... बड़ी से बड़ी परेशानी में भी हमेशा ख़ुश और हँसती रहने वाली लड़की... वो कभी हर महफिल की जान हुआ करती थी जो आज ख़ुद से भी इतना कटी कटी रहती है... ख़ुद से ही नाराज़... कब वो इतना बदल गयी... उसकी वो हँसी कहाँ गायब हो गयी उसे भी कहाँ पता चला था... बहुत चिड़चिड़ी हो गई थी वो... बात बात पे गुस्सा करने लगी थी... नाराज़ रहने लगी थी... लोग अक्सर उससे शिकायत करने लगे थे उसके स्वभाव को ले कर... पर जो लोग उसे अभी-अभी मिले थे वो उसे जानते ही कितना थे... वो हर किसी की शिकायत सुनती और चिढ़ जाती... एक अजीब सी खीझ भरती जा रही थी उसके मन में सबके प्रति... एक बेहद गहरी ख़ामोशी उसे घेरती जा रही थी जो सिर्...