एक सवेरा

एक सवेरा जग  होगा ,मुझ में कहीं
जो हो चूका है ,न होगा दोबारा
के कल तो जा चूका है ....
वो मौसम
बदल रहा होगा ,मुझमे कहीं !
एक उजली सी चादर दिख रही होगी
कुछ स्वर गूंज रहे होंगे !
वो अँधेरा   ढल रहा होगा
मुझमे कहीं !!!
कुछ उम्मीदे पनप रही होंगी
उजाला हो चूका होगा ,मुझमे कहीं
सभी तो जग चुके हैं
मुझे भी  जागना होगा !!!
आज कुछ नया करना होगा
के कल में सो न पाऊं
के कल ये हो न पाए ...
मुझे हसना ही होगा
और लड़ना ही होगा
ये मेने जान लिया है
के जब मै  रो रही होंगी ,अँधेरा हो रहा होगा
और उस अँधेरे में फिर मुझे सोना ही होगा
कुछ सपने पल रहे होंगे ,मुझमे कही
और फिर एक आस मुझको
जगाएगी
के उठ जा सवेरा हो चूका है
एक और दिन कल इतिहास बन जायेगा
मुझे जागना ही होगा
कुछ करना ही होगा
सवेरा हो चूका है अब मुझमे कही 

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